अधूरी मोहब्बत का अफ़साना रह गया, तेरी यादों में एक दीवाना रह गया।
टूटे हुए दिल का हाल कोई क्या समझेगा, जो दर्द में भी मुस्कुराए, उसे कौन अपना समझेगा?
बिछड़कर भी तुझसे दूर नहीं जा सके, तेरे ख्यालों ने जंजीरें बांध रखी हैं, अब इनसे आज़ाद हों भी तो कैसे?
तेरी यादों से दूर जाना चाहता हूं, पर हर रास्ता तुझ तक ही जाता है, अब इस दिल को समझाऊं तो कैसे?
जिसे टूटकर चाहा था, वो मेरी तड़प को भी नहीं समझा, अब क्या उम्मीद करें किसी और से?
दिल चाहता है तुझे फिर से बुला लूं, तेरी बाहों में खो जाऊं, पर अब ये मुमकिन नहीं रहा।
जो कल तक मेरी दुनिया था, आज किसी और का हो गया, और मैं उसी मोड़ पर अकेला खड़ा रह गया।
तेरे साथ बिताए लम्हे आज भी दिल में हैं, तेरी बेवफाई ने मुझे तोड़ दिया, पर यादें अब भी सांसों में बसी हैं।
मुझे बस इतना समझा दो, जिसे चाहा था खुद से ज्यादा, वो ही बेगाना क्यों बन गया?
तेरी यादें अब भी साथ हैं, तू गया तो क्या हुआ, तेरी खुशबू अब भी हवाओं में बसी है।
मोहब्बत की राहों में अक्सर दर्द ही मिलता है, जो सच्चा प्यार करता है, वही सबसे ज्यादा रोता है।
तेरी बेरुखी ने मुझे खामोश कर दिया, अब किसी से शिकायत नहीं होती, बस खुद से ही सवाल करने लगे हैं।
मुझे रोता देखकर भी जिसे फर्क नहीं पड़ा, वो मेरा सब कुछ था, पर मैं उसका कुछ भी नहीं, अब बस इसी बात ने सब खत्म कर दिया।
तेरी जुदाई ने हमें क्या बना दिया, जो कल तक मुस्कुराते थे, आज अश्कों में अपना दर्द छुपाते हैं।
किस्मत के खेल ने सब कुछ बदल दिया, जो मेरा था, वो किसी और का हो गया, और मैं वहीं रह गया, तन्हा और अधूरा।
जिसके लिए खुद को भुला दिया मैंने, आज वही कहता है कि पहचानते नहीं, इससे बड़ी सजा और क्या होगी?
तेरी मोहब्बत में खुद को मिटा दिया, तेरे लिए दुनिया छोड़ दी, पर तुझे मेरी फिक्र तक नहीं थी।
बेवफाई की हद देखी है तेरी, जिससे जीने की वजह मिली थी, आज वही छोड़कर चला गया।
तेरी हंसी की खनक आज भी याद है, वो बातें, वो लम्हे दिल में बस गए, अब अकेले उन्हीं यादों में जीते हैं।
खुश रहना तू मेरी तक़दीर में नहीं, तेरा नाम लिखकर भी मुकद्दर अधूरा रह गया, अब सिर्फ खामोशियों से ही मोहब्बत कर ली है।