खुद को तसल्ली देते रहते हैं, कि तू खुश है कहीं और, पर दिल कहता है, काश तू मेरे साथ होता।
बिछड़कर भी तुझसे जुड़ा रह गया, तेरी चाहत में अधूरा ख्वाब सा रह गया, अब इस अधूरेपन को ही जीना सीख लिया।
तेरी यादों के साए में अब भी जी रहे हैं, हर लम्हा तुझे महसूस कर रहे हैं, तू पास नहीं, पर फिर भी तेरे ही हैं।
कभी अपना बनाकर फिर अजनबी बना दिया, दिल को इतनी बेदर्दी से तोड़ा उसने, कि हमें खुद से भी बेगाना बना दिया।
किसी ने पूछा कैसे हो, हमने हंसकर कह दिया ठीक हूं, पर सच तो ये है कि दिल रोने को मजबूर है, बस आंसू छलकने की इजाज़त नहीं देते।
रिश्तों की कदर हमें तब समझ आई, जब सबसे करीब रहने वाले ही दूर हो गए, और हम बस उनकी यादों में खो गए।
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