जो हमें नहीं समझते, उन्हें तो हम कुछ भी नहीं समझते, हमारी मस्ती की चाय अब और भी कड़क हो गई है।जो हमें नहीं समझते, उन्हें तो हम कुछ भी नहीं समझते, हमारी मस्ती की चाय अब और भी कड़क हो गई है।
फूलों की तरह नहीं, कांटे की तरह बिखर जाते हैं, हम तो वही हैं, जो खुद को भी परख लेते हैं।
खिलते हुए गुलाब से डर नहीं लगता, मुझे उन पर तो जो कांटे होते हैं, उनसे डर लगता है।
कभी मुस्कुरा कर दिल में आग लगा देते हैं, हमारे आने से पहले लोग डर ही जाते हैं।
राहों में कांटे खुद बिछा कर चलते हैं, हम बुरे नहीं, बस थोड़े से अजनबी होते हैं।
सच कहें तो हमें इन झूठी मोहब्बतों से नफरत है, हम तो बस अपनी ही दुनिया में बेतहाशा मस्त हैं।
वो बदमाशी तो सिर्फ दिखाने की बात थी, हमारे दिल में कभी भी कोई ग़लत बात नहीं होती।
हमारा तो बस यही अंदाज है, कभी हंसते हैं, कभी गुस्से में आ जाते हैं।
तेरा डर दूर करना हमारा शौक है, अच्छा, हम बुरे हैं, यही तो हमारा हुनर है।
तेरा हौसला देख कर, अब हम भी बुरी तरह बदमाश हो गए, तूने शरारत की, तो हम भी दिल से फितूर हो गए।